सोमवार, 1 जून 2026

हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी खबर: अब मोबाइल ऐप से एडवांस बुक होगी यूरिया और डीएपी खाद

Haryana Digital Fertilizer Scheme : देश के अन्नदाताओं को अब खाद और यूरिया की किल्लत से निजात दिलाने के लिए सरकार एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने संयुक्त रूप से 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' नाम से एक नई डिजिटल खाद वितरण प्रणाली तैयार की है। हरियाणा के यमुनानगर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों को इस बेहद महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद किसानों को खाद की दुकानों के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मोबाइल ऐप से होगी एडवांस बुकिंग, मिलेगा क्यूआर कोड



इस नई डिजिटल प्रणाली के तहत किसानों को खाद लेने से पहले अपने स्मार्टफोन पर मौजूद आधिकारिक ऐप के जरिए अग्रिम बुकिंग करनी होगी। ऐप पर किसानों को अपनी कृषि भूमि का ब्योरा और वर्तमान फसल की जानकारी दर्ज करनी होगी। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, किसान के मोबाइल पर एक क्यूआर कोड (QR Code) आधारित डिजिटल टोकन जारी हो जाएगा। यह टोकन इस बात की गारंटी होगा कि संबंधित किसान के हिस्से की खाद सुरक्षित कर ली गई है।

दुकानों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही मिलेगी खाद

जब किसान अपनी चुनी हुई दुकान या फर्टिलाइजर डीलर के पास पहुंचेगा, तो डीलर अपनी पीओएस (POS) मशीन से किसान के मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके तुरंत बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दोहरे सत्यापन के सफल होते ही खाद का वितरण कर दिया जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया से यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी और अवैध स्टॉक रखने वाले बिचौलियों पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।

तकनीकी चुनौतियां और बैकअप के विकल्प मौजूद

इस नई हाई-टेक व्यवस्था को लेकर धरातल पर कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी आ सकती हैं। रबी और खरीफ फसलों की बुवाई के पीक सीजन के दौरान जब लाखों किसान एक साथ ऐप का उपयोग करेंगे, तो सर्वर डाउन होने की आशंका बनी रहेगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग या कम पढ़े-लिखे किसानों को स्मार्टफोन ऐप चलाने में परेशानी आ सकती है। कड़ी मेहनत के कारण कई किसानों के उंगलियों के निशान घिस जाते हैं, जिससे बायोमेट्रिक मिसमैच की समस्या होती है। हालांकि, विभाग ने साफ किया है कि क्यूआर कोड या बायोमेट्रिक काम न करने पर किसान आईडी, आधार नंबर या एप्लिकेशन नंबर के जरिए भी मैन्युअल सत्यापन कर खाद दी जा सकेगी। Read More

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