सनातन धर्म और ज्योतिषीय परंपराओं में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए जून महीने का पहला हफ्ता बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आगामी 6 जून 2026, शनिवार को शाम 7 बजकर 03 मिनट से पंचक काल की शुरुआत होने जा रही है। यह पंचक काल अगले पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा और 11 जून, गुरुवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगा। शनिवार के दिन से प्रारंभ होने की वजह से इसे ज्योतिषीय भाषा में 'मृत्यु पंचक' का नाम दिया गया है, जिसे सभी पंचकों में सबसे अधिक संवेदनशील और सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है।
जानिए कैसे बनता है पंचक का यह विशेष योग
आकाशीय मंडल और ग्रहों की चाल के आधार पर जब चंद्रमा कुंभ राशि के अंतिम दो नक्षत्रों और मीन राशि के तीन नक्षत्रों में गोचर करता है, तो उस समय अवधि को पंचक कहा जाता है। इसमें धनिष्ठा का उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती समेत कुल पांच नक्षत्र शामिल होते हैं। दिनों के हिसाब से इनका नाम और प्रभाव बदल जाता है। जैसे सोमवार या बुधवार को राज पंचक, मंगलवार या गुरुवार को अग्नि पंचक, शुक्रवार को चोर पंचक, रविवार को रोग पंचक और शनिवार को सबसे घातक माना जाने वाला मृत्यु पंचक लगता है। Read More

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