मंगलवार, 2 जून 2026

Sunroof Car Disadvantages: सनरूफ वाली कार मालिकों की बढ़ी टेंशन, माइलेज गिरने के साथ एसी हो रहा फेल

 Sunroof Car Problems in Summer : चिलचिलाती धूप में कार का सनरूफ फीचर आफत बन रहा है। ताप्ती गर्मी में सनरूफ के कारण कारों का केबिन भट्टी की तरह तप रहा है। इसके साथ ही कार की माइलेज घटने की शिकायतें आ रही हैं। इसको देखते हुए ऑटो एक्सपर्ट्स ने इस मौसम में सनरूफ कारों के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर जरूरी चेतावनी जारी की है।

इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में कार खरीदारों का सबसे पसंदीदा सनरूफ फीचर अब उनके लिए जी का जंजाल बन गया है। कुछ साल पहले तक सिर्फ महंगी गाड़ियों में आने वाला यह प्रीमियम फीचर अब बजट कारों में भी धड़ल्ले से मिल रहा है। लोग कार को स्टाइलिश लुक देने और ताजी हवा के लिए इसे खरीदते तो हैं, लेकिन जून की इस तपती धूप में यही सनरूफ कार सवारों की सेहत और जेब दोनों पर भारी पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल्स विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मी के इस मौसम में सनरूफ वाली कारों के रखरखाव में लापरवाही भारी नुकसान करा सकती है।

भट्टी की तरह तप रहा है केबिन और घट रहा है माइलेज



वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सनरूफ में इस्तेमाल होने वाला कांच गाड़ी की लोहे वाली मजबूत छत की तुलना में बेहद तेजी से गर्मी को केबिन के अंदर ट्रांसफर करता है। भले ही आजकल की नई कारों में यूवी-प्रोटेक्टेड या टिंटेड ग्लास दिए जा रहे हैं, लेकिन दोपहर की सीधी धूप पड़ते ही कार के अंदर का तापमान सामान्य गाड़ियों से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। जब केबिन इतना ज्यादा गर्म हो जाता है, तो कार के एयर कंडीशनर (AC) को अंदरूनी हिस्से को ठंडा करने के लिए दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है। कंप्रेसर पर लगातार दबाव बने रहने से गाड़ी के इंजन पर लोड पड़ता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत अचानक बढ़ जाती है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में तो इसके चलते बैटरी बहुत तेजी से डिस्चार्ज होने लगती है, जिससे उनकी ड्राइविंग रेंज सीधे तौर पर घट जाती है।

सेहत पर सीधा हमला और रबर सील खराब होने का डर

गर्मियों के दिनों में शौक-शौक में सनरूफ खोलकर ड्राइविंग करना सीधे तौर पर बीमारियों को बुलावा देना है। दोपहर के वक्त सीधे सिर और चेहरे पर पड़ने वाली तेज धूप के कारण कार सवारों को अचानक सिरदर्द, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और स्किन एलर्जी जैसी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही इस झुलसाने वाले तापमान और सड़कों पर उड़ने वाली धूल-मिट्टी का सीधा असर सनरूफ मैकेनिज्म पर पड़ता है। अत्यधिक गर्मी के कारण सनरूफ के चारों तरफ लगी रबर की वॉटरप्रूफ सील सूखकर चटकने लगती है। अगर समय रहते इसकी सर्विसिंग न कराई जाए, तो आने वाले बरसाती मौसम में कार की छत से पानी टपकने की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

चलती कार में बच्चों को बाहर निकालना जानलेवा

सड़कों पर अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता अपनी चलती गाड़ी के सनरूफ से बच्चों को बाहर निकाल देते हैं। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे व्यस्त इलाकों में यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ट्रैफिक नियमों का गंभीर उल्लंघन है। तेज रफ्तार गाड़ी में अचानक ब्रेक लगने या सड़क के गड्ढों के कारण बच्चा सीधे बाहर गिर सकता है या उसे गंभीर चोट आ सकती है। इसके अलावा इस मौसम की गर्म थपेड़े और लू के सीधे संपर्क में आने से बच्चे तुरंत बीमार पड़ रहे हैं।

तपती गर्मी में सनरूफ कार मालिकों के लिए जरूरी टिप्स

इस मौसम में कार को हमेशा किसी शेड या छायादार जगह पर ही पार्क करने की कोशिश करें। धूप में गाड़ी चलाते समय सनरूफ के नीचे दिए गए कपड़े के सनशेड (ब्लाइंड) को हमेशा पूरी तरह बंद रखें। अगर आपकी कार धूप में खड़ी थी, तो सीधे एसी ऑन करके बैठने के बजाय पहले दो मिनट के लिए कार के चारों दरवाजे खोल दें ताकि अंदर की गर्म हवा बाहर निकल जाए। दोपहर के समय सनरूफ को पूरी तरह बंद रखें। इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चे सनरूफ से बाहर निकलने की जिद करें तो साफ मन कर दें।

क्या आपकी राशि भी है इसमें शामिल? गुरु के कर्क राशि में आते ही पैसों के मामले में हो जाएं सावधान

 Guru Gochar 2026 : ग्रहों के राजा और ज्ञान के कारक देवगुरु बृहस्पति ने आज यानी 02 जून 2026 की रात 01:50 बजे एक बहुत बड़ा राशि परिवर्तन किया है। गुरु बृहस्पति अब अपनी पुरानी राशि को छोड़कर कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। ज्योतिष विज्ञान में इस गोचर को साल 2026 की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी खगोलीय घटना माना जा रहा है। आमतौर पर आम जनता यह मानती है कि गुरु का गोचर हमेशा शुभ और सोने जैसा भाग्य लेकर आता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इस बड़े बदलाव के कारण देश के आम आदमी की जेब, सेहत और पारिवारिक जीवन पर सीधा और बड़ा असर पड़ने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कुल 7 राशियां ऐसी हैं जिन्हें आने वाले समय में मौज-मस्ती करने के बजाय बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

कर्क, वृषभ और मेष राशि वाले अति-उत्साह से बचें



गुरु बृहस्पति सीधे आपकी ही राशि यानी कर्क में आ रहे हैं। यह स्थिति आपके भीतर आत्मविश्वास तो कूट-कूट कर भरेगी, लेकिन इसके साथ ही अति-उत्साह का एक बड़ा खतरा भी लेकर आएगी। अक्सर लोग किस्मत के भरोसे बैठकर मेहनत करना छोड़ देते हैं, यही गलती आपको भारी पड़ सकती है। अनुशासन बनाए रखें और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। वहीं वृषभ राशि वालों के लिए यह गोचर किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होने वाला है। आपको कार्यस्थल पर सफलता पाने के लिए एक्स्ट्रा जोर लगाना पड़ेगा, साथ ही सहकर्मियों और भाई-बहनों से बात करते समय अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना होगा। मेष राशि के जातकों को इस समय अपने घर और परिवार के मामलों में बहुत ज्यादा अलर्ट रहना होगा। घरेलू जिम्मेदारियां अचानक बढ़ेंगी और यदि आप कोई नई प्रॉपर्टी खरीदने या घर का रिनोवेशन कराने की सोच रहे हैं, तो बिना कागजात पढ़े साइन बिल्कुल न करें।

कुंभ और तुला राशि के जातकों पर बढ़ेगा काम का बोझ

कुंभ राशि के नौकरीपेशा लोगों को अब ऑफिस में काफी भागदौड़ और कड़े कंपटीशन का सामना करना पड़ेगा। काम का अत्यधिक बोझ आपको मानसिक रूप से चिड़चिड़ा बना सकता है, जिससे बचने के लिए आपको अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना होगा। यदि आपका कोई पुराना कर्ज या कानूनी झगड़ा चल रहा है, तो उसे तुरंत निपटा लें, वरना मुसीबत बढ़ सकती है। तुला राशि वालों के लिए भी यह समय दफ्तर में जिम्मेदारियों का पहाड़ लेकर आने वाला है। आपको तरक्की के नए मौके जरूर मिलेंगे, लेकिन उसके साथ आने वाला मानसिक प्रेशर आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है। कार्यस्थल पर ओवर-कॉन्फिडेंस में आकर कोई भी ऐसी बात न कहें, जो आपके प्रोफेशनल रिश्तों को हमेशा के लिए खराब कर दे।

धनु और सिंह राशि वाले आर्थिक फैसलों में बरतें भारी सावधानी

धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर जीवन में किसी बहुत बड़े और अचानक आने वाले बदलाव का साफ संकेत है। आपके करियर या पर्सनल लाइफ में अचानक कोई नया मोड़ आ सकता है। इस दौरान पैतृक संपत्ति, इंश्योरेंस या टैक्स से जुड़े पैसों के लेन-देन के मामले बुरी तरह उलझ सकते हैं, इसलिए ठंडे दिमाग से ही कोई भी फैसला लें। सिंह राशि वाले जातकों के लिए गुरु का यह राशि परिवर्तन जेब पर भारी पड़ने वाला है। अचानक होने वाली यात्राओं, सेहत से जुड़ी दिक्कतों या परिवार की जरूरतों पर आपका मोटा पैसा खर्च होने के योग बन रहे हैं। मानसिक उलझनों के कारण गलत फैसले लेने से बचें और अपनी जमा-पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करें।

गर्मियों में बार-बार हो रहे हैं मुंह के छाले? कहीं वजह पेट की गर्मी तो नहीं?

 


Mouth Ulcers Home Remedies : गर्मियों के मौसम में तेज धूप और पसीने के साथ-साथ मुंह के छालों (Mouth Ulcers) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। शरीर में पानी की कमी, पेट की गर्मी और जरूरी विटामिनों का अभाव इसका मुख्य कारण बनता है। देश के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस असहज करने वाली बीमारी के सटीक कारण और इससे तुरंत राहत पाने के बेहद असरदार घरेलू उपायों की जानकारी साझा की है।

देशभर में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में मुंह के छालों (Summer Mouth Ulcers) से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। तेज धूप, पसीना और डिहाइड्रेशन के इस मौसम में जीभ, मसूड़ों और होंठों के अंदरूनी हिस्से में होने वाले ये सफेद-पीले घाव आम आदमी का जीना मुहाल कर रहे हैं। इस समस्या के चलते लोगों का खाना-पीना, बोलना और यहां तक कि पानी पीना भी दर्दनाक हो जाता है। ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा हॉस्पिटल के आंतरिक चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. श्रेय श्रीवास्तव और प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने इस समस्या के पीछे के वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक कारणों को स्पष्ट करते हुए इससे निपटने के कारगर तरीके बताए हैं।

डिहाइड्रेशन और पेट की खराबी है असली विलेन

शारदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक गर्मियों में इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी होना है। जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो मुंह सूखने लगता है और उसकी बेहद संवेदनशील अंदरूनी परत छिल जाती है, जो बाद में घाव का रूप ले लेती है। इसके अलावा, अत्यधिक पसीना बहने से शरीर से जरूरी विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। इस मौसम में मसालेदार, तला-भुना और गर्म भोजन खाना सीधे तौर पर पेट की गर्मी और कब्ज को बढ़ाता है, जिसका सीधा असर मुंह के अंदर छालों के रूप में दिखाई देता है। मानसिक तनाव और अपर्याप्त नींद भी इस समस्या को गंभीर बना देती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अगर आपको मुंह के भीतर सफेद या पीले रंग के छोटे घाव दिखाई दे रहे हैं, जिनके चारों तरफ लालपन है, तो यह मुंह के छाले हैं। ऐसी स्थिति में तीखा या खट्टा खाने पर असहनीय जलन होती है। भोजन निगलने में होने वाली परेशानी और मुंह में लगातार होने वाली चुभन इसके प्राथमिक लक्षण हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही मानते हैं कि खानपान में थोड़ी सी सतर्कता और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस दर्दनाक समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है।

छालों को तुरंत शांत करेंगे ये घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय

डॉ. चंचल शर्मा ने छालों के दर्द और सूजन से तुरंत राहत पाने के लिए कुछ बेहद सरल और प्रभावी उपाय सुझाए हैं। नारियल पानी का नियमित सेवन शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है और पेट को अंदरूनी ठंडक देता है। इसके अलावा, भोजन के साथ ठंडी छाछ का इस्तेमाल पाचन तंत्र के प्रोबायोटिक्स को सक्रिय करता है, जिससे पेट साफ रहता है और छाले ठीक होते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी की 4-5 पत्तियां सुबह-शाम चबाने से मुंह के बैक्टीरिया खत्म होते हैं।

घाव पर साफ उंगली से शहद या एलोवेरा जेल लगाने से इसकी एंटी-बैक्टीरियल और हीलिंग प्रॉपर्टीज दर्द को तुरंत सोख लेती हैं। रात को सोने से पहले छालों पर थोड़ा देसी घी लगाने से त्वचा की नमी लौट आती है। इसके साथ ही, मुलेठी के पानी से कुल्ला करना या हल्के गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करना एक आजमाया हुआ नुस्खा है, जो संक्रमण को बढ़ने से रोकता है।

कब हो जाता है डॉक्टर को दिखाना जरूरी

आमतौर पर मुंह के ये साधारण घाव 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसके लिए बस मुंह की साफ-सफाई, गहरी नींद और तंबाकू-धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी होता है। लेकिन डॉ. श्रेय श्रीवास्तव सचेत करते हैं कि अगर आपके छाले दो सप्ताह से ज्यादा समय तक ठीक नहीं हो रहे हैं, या छालों का आकार लगातार बढ़ रहा है, तो लापरवाही भारी पड़ सकती है। बार-बार छालों का निकलना, असहनीय दर्द के कारण खाना पूरी तरह बंद हो जाना या छालों के साथ तेज बुखार आना किसी गंभीर अंदरूनी संक्रमण या बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

चाय शौकीन सावधान: सुबह और शाम की चाय में है बड़ा अंतर, एक गलती छीन लेगी रात की नींद

सेहत, फिटनेस, फैशन, ब्यूटी और रिलेशनशिप से जुड़ी आसान और उपयोगी जानकारी आपकी बेहतर लाइफस्टाइल के लिए।

सोमवार, 1 जून 2026

तपती गर्मी में भी फूलों से भर जाएगा गुड़हल का पौधा, बस आजमाएं एक्सपर्ट्स के ये आसान टिप्स

Summer Hibiscus Care Tips : उत्तर भारत समेत हरियाणा के कई जिलों में पारा तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। इस झुलसाने वाली धूप और लू के थपेड़ों के कारण घरों के बगीचों और बालकनी में लगे पौधे अक्सर सूखने या मुरझाने लगते हैं। लेकिन इस भीषण मौसम में भी लाल, पीले और गुलाबी रंग के फूलों से सजने वाला गुड़हल का पौधा आपके घर की रौनक बनाए रख सकता है। बशर्ते आपको चिलचिलाती धूप में इसकी देखभाल का सही तरीका पता हो। नर्सरी संचालकों और बागवानी एक्सपर्ट्स ने कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक टिप्स साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने गुड़हल के पौधे को पूरे सीजन हरा-भरा और फूलों से भरपूर रख सकते हैं।

सुबह का पानी और धूप का सही संतुलन है सबसे जरूरी


गर्मियों के इस कड़े मौसम में गुड़हल के पौधे को पानी देने का समय सबसे ज्यादा मायने रखता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो पौधे को हमेशा सुबह सूरज उगने के तुरंत बाद या जल्दी पानी देना चाहिए। इससे मिट्टी दिनभर की तेज धूप को झेलने के लिए तैयार हो जाती है और जड़ों को लगातार नमी मिलती रहती है। हालांकि गुड़हल को फूल उगाने के लिए सीधी धूप की जरूरत होती है, लेकिन मई-जून की दोपहर वाली तीखी धूप इसकी कोमल पत्तियों को जला सकती है। इसलिए गर्मियों में गमले को ऐसे स्थान पर शिफ्ट करें जहां सुबह की 4-5 घंटे की सीधी धूप मिले और दोपहर बाद हल्की छाया रहे। Read More

सूखती हुई तुलसी में जान फूंक देगा नीम का पानी, जानें इस्तेमाल का सही तरीका और सावधानियां

Neem Water for Tulsi Plant : हिंदू धर्म में आस्था का केंद्र और औषधीय गुणों की खान माना जाने वाला तुलसी का पौधा लगभग हर भारतीय घर के आंगन की शोभा बढ़ाता है। लेकिन अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि कड़ी देखभाल के बाद भी तुलसी का पौधा सूख जाता है, पत्तियां पीली पड़ जाती हैं या उनमें काले-सफेद कीड़े लग जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बागवानी विशेषज्ञों ने एक बेहद सस्ता और पूरी तरह से प्राकृतिक उपाय सुझाया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल कीटनाशकों के बजाय नीम का पानी तुलसी को पुनर्जीवन देने और उसे कीड़ों से बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

तुलसी के लिए संजीवनी क्यों माना जाता है नीम का पानी?


नीम को सदियों से एक बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-फंगल और कीटनाशक माना गया है। इसकी पत्तियों और छाल में ऐसे कड़वे तत्व पाए जाते हैं जो पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले बारीक कीड़ों, मिलीबग और एफिड्स को तुरंत दूर भगाते हैं। तुलसी पर अक्सर सफेद रंग के मिलीबग का हमला होता है, जो धीरे-धीरे पौधे का पूरा रस चूस लेते हैं। ऐसे में नीम का पानी पौधे पर एक अदृश्य सुरक्षा कवच बना देता है। चूंकि तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल चाय, काढ़े और पंचामृत में सीधे तौर पर होता है, इसलिए इस पर किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। Read More

बड़ी खबर: हरियाणा में 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ बढ़ा हुआ वेतन, सफाई कर्मियों को मिलेंगे ₹18,200

 Haryana Safai Karamchari Salary Hike : हरियाणा के ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता व्यवस्था संभाल रहे हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। चंडीगढ़ में सरकार और आंदोलनकारी कर्मचारियों के बीच विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। सूबे के कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और कृष्ण पंवार के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में बनी सहमति के बाद कर्मचारियों ने 15 मई से जारी अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस ले लिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के गांवों में ठप पड़ी सफाई व्यवस्था दोबारा पटरी पर लौट आई है और सभी कर्मी काम पर वापस आ गए हैं।

साढ़े 11 हजार ग्रामीण सफाई कर्मियों को पक्का करेगी सरकार



कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और कृष्ण पंवार ने कर्मचारी संगठनों को आधिकारिक तौर पर आश्वस्त किया है कि गांवों में तैनात करीब साढ़े 11 हजार सफाई कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए 31 दिसंबर 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की समीक्षा की जाएगी। सरकार इसके लिए एक विशेष नीति तैयार कर रही है ताकि इन कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ हो सके। इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले गरीब परिवारों को सीधे तौर पर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

वेतन बढ़कर होगा ₹26,000, हर साल मिलेगी वेतन वृद्धि

बैठक में कर्मचारियों के मानदेय को लेकर भी बेहद वित्तीय फैसले लिए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का कुल वेतन ₹26,000 करने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसमें हर साल ₹2100 की निश्चित बढ़ोतरी जोड़ी जाएगी। इसके साथ ही अंतरिम राहत देते हुए 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों का मासिक वेतन ₹16,100 से बढ़ाकर ₹18,200 कर दिया गया है। सरकार ने यह भी माना है कि इस वर्ग को महंगाई के दौर में आर्थिक संबल देना जरूरी है, जिसके तहत उन्हें हर साल दिवाली पर बोनस भी दिया जाएगा। Read More

हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी खबर: अब मोबाइल ऐप से एडवांस बुक होगी यूरिया और डीएपी खाद

Haryana Digital Fertilizer Scheme : देश के अन्नदाताओं को अब खाद और यूरिया की किल्लत से निजात दिलाने के लिए सरकार एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव करने जा रही है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने संयुक्त रूप से 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' नाम से एक नई डिजिटल खाद वितरण प्रणाली तैयार की है। हरियाणा के यमुनानगर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों को इस बेहद महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद किसानों को खाद की दुकानों के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मोबाइल ऐप से होगी एडवांस बुकिंग, मिलेगा क्यूआर कोड



इस नई डिजिटल प्रणाली के तहत किसानों को खाद लेने से पहले अपने स्मार्टफोन पर मौजूद आधिकारिक ऐप के जरिए अग्रिम बुकिंग करनी होगी। ऐप पर किसानों को अपनी कृषि भूमि का ब्योरा और वर्तमान फसल की जानकारी दर्ज करनी होगी। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, किसान के मोबाइल पर एक क्यूआर कोड (QR Code) आधारित डिजिटल टोकन जारी हो जाएगा। यह टोकन इस बात की गारंटी होगा कि संबंधित किसान के हिस्से की खाद सुरक्षित कर ली गई है।

दुकानों पर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही मिलेगी खाद

जब किसान अपनी चुनी हुई दुकान या फर्टिलाइजर डीलर के पास पहुंचेगा, तो डीलर अपनी पीओएस (POS) मशीन से किसान के मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके तुरंत बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस दोहरे सत्यापन के सफल होते ही खाद का वितरण कर दिया जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस पूरी पारदर्शी प्रक्रिया से यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी और अवैध स्टॉक रखने वाले बिचौलियों पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी।

तकनीकी चुनौतियां और बैकअप के विकल्प मौजूद

इस नई हाई-टेक व्यवस्था को लेकर धरातल पर कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी आ सकती हैं। रबी और खरीफ फसलों की बुवाई के पीक सीजन के दौरान जब लाखों किसान एक साथ ऐप का उपयोग करेंगे, तो सर्वर डाउन होने की आशंका बनी रहेगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग या कम पढ़े-लिखे किसानों को स्मार्टफोन ऐप चलाने में परेशानी आ सकती है। कड़ी मेहनत के कारण कई किसानों के उंगलियों के निशान घिस जाते हैं, जिससे बायोमेट्रिक मिसमैच की समस्या होती है। हालांकि, विभाग ने साफ किया है कि क्यूआर कोड या बायोमेट्रिक काम न करने पर किसान आईडी, आधार नंबर या एप्लिकेशन नंबर के जरिए भी मैन्युअल सत्यापन कर खाद दी जा सकेगी। Read More