बुधवार, 3 जून 2026

डिजिटल अरेस्ट से बुजुर्गों को बचाएगा बैंकों का नया 'Dual OTP' सिस्टम, पुलिस ने जारी की सख्त गाइडलाइंस 

 Dual OTP System kya hai : आजकल हर किसी के साथ किसी न किसी बहाने ऑनलाइन ठगी हो रही है। साथ में डिजिटल अरेस्ट और फर्जी इनवेस्टमेंट स्कीम के जरिए आम लोगों के साथ साथ बुजुर्गों को भी निशाना बनाया जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए अब बैंक ने डूअल ओटीपी सिस्टम शुरू किया है।

अब इस नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी बड़े ट्रांजैक्शन के लिए दो अलग-अलग लोगों के पास OTP जाएगा। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस नए सुरक्षा चक्र को लेकर आम जनता के लिए विशेष अलर्ट और एडवाइजरी जारी की है।

जम्मू कश्मीर पुलिस ने जून 2026 की इस बड़ी अपडेट में बुजुर्गों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए बैंकों के 'डुअल OTP सिस्टम' (Dual OTP System) को सबसे बड़ा हथियार बताया है। लगातार बढ़ती ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं को देखते हुए कई प्रमुख बैंकों ने अपने खाताधारकों, खासकर सीनियर सिटीजंस के लिए यह अतिरिक्त सुरक्षा लेयर अनिवार्य करनी शुरू कर दी है। इस सिस्टम के लागू होने से साइबर ठगों द्वारा डरा-धमकाकर पैसे ट्रांसफर कराने के धंधे पर पूरी तरह ताला लग जाएगा।

क्या है यह डुअल OTP सिस्टम ? यह कैसे काम करेगा? 



ऑनलाइन बैंकिंग को सुरक्षित बनाने के लिए तैयार किया गया डुअल OTP सिस्टम वित्तीय लेनदेन के दौरान सुरक्षा का एक अभेद्य किला खड़ा करता है। इस नई व्यवस्था में किसी भी विशेष या बड़े ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए बैंक एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जारी करता है। इसमें पहला OTP हमेशा की तरह सीधे खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर डिलीवर होता है। इसके तुरंत बाद, दूसरा OTP खाताधारक के बैंक अकाउंट से लिंक किए गए किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य, कानूनी वारिस या नॉमिनी के मोबाइल पर भेजा जाता है। जब तक नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप में ये दोनों अलग-अलग OTP दर्ज नहीं किए जाएंगे, तब तक बैंक खाते से एक रुपया भी ट्रांसफर नहीं हो सकेगा।

फर्जी पुलिस कॉल्स का खेल खत्म होगा 

साइबर अपराधी अक्सर खुद को सीबीआई, कस्टम विभाग, पुलिस अधिकारी या रिजर्व बैंक का प्रतिनिधि बताकर बुजुर्गों में जेल जाने का डर पैदा कर देते हैं। ठग पीड़ितों को घंटों तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर यानी डिजिटल अरेस्ट करके जल्दबाजी में बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य अपराधियों द्वारा बनाए जाने वाले इसी मानसिक दबाव को बेअसर करना है। अगर शातिर ठग डरा-धमकाकर या झांसा देकर खाताधारक से पहला OTP हासिल करने में कामयाब हो भी जाते हैं, तो भी वे दूसरा OTP पाए बिना चोरी नहीं कर पाएंगे। दूसरा OTP परिवार के किसी अन्य सदस्य के पास होने के कारण अपराधी का पूरा प्लान फेल हो जाएगा।

लोगों को मिलेगा रियल-टाइम अलर्ट 

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल OTP तक सीमित नहीं है। अगर बुजुर्ग खाताधारक के अकाउंट से कोई असामान्य वित्तीय गतिविधि या आधी रात को कोई बड़ा ट्रांजैक्शन करने की कोशिश की जाती है, तो बैंक तुरंत परिवार के नामित सदस्य को इमरजेंसी अलर्ट भेज देता है। इस रियल-टाइम चेतावनी के मिलते ही परिवार के लोग तुरंत बीच में दखल दे सकते हैं और ठगी का शिकार हो रहे बुजुर्ग को समय रहते बचा सकते हैं।

जम्मू कश्मीर पुलिस ने जारी की ये गाइडलाइंस 

नई सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस के साइबर विंग ने आम जनता से बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि लोग अपने घरों के बुजुर्ग सदस्यों के पास बैठें और उन्हें डिजिटल अरेस्ट जैसे नए दौर के फ्रॉड के बारे में लगातार जागरूक करें। किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या ईमेल के आने पर अपना बैंकिंग पासवर्ड, सीवीवी या कोई भी गोपनीय जानकारी कभी भी साझा न करें। इसके साथ ही पुलिस ने सभी बैंक ग्राहकों को तुरंत अपनी नजदीकी बैंक शाखा में जाकर यह पता करने की सलाह दी है कि उनके खाते पर डुअल OTP की सुरक्षा सुविधा उपलब्ध है या नहीं, ताकि इसे तुरंत चालू कराया जा सके।

Vastu Tips : क्या टूटी चप्पल को सिलवाकर पहनना चाहिए? इससे शनि देव नाराज होते हैं क्या

 Broken Slipper Vastu Tips in Hindi : कई बार हमारी कंजूसी हम पर भरी पद जाती है। हम सभी ऐसी गलतियाँ करते हैं जो कही ना कही हमें उलझन में डाल देती है। ऐसी ही एक आदत है टूटी हुई चप्पल को दोबारा सिलवाकर पहनना। वास्तु शास्त्र के अनुसार टूटे या पुराने जूते शनि दोष को बढ़ाते हैं। इस कारण आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

लोग चप्पल या जूते के टूट जाने पर उसे मोची से सिलवाकर या चिपकाकर दोबारा पहनने लगते हैं। आम आदमी को लगता है कि इस मरम्मत से कुछ दिनों का खर्च बच गया, लेकिन ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के कड़े नियमों के मुताबिक यह छोटी सी बचत आपकी बर्बादी का कारण बन सकती है। सनातन परंपरा और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, टूटे हुए फुटवियर न केवल आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूल में मिलाते हैं, बल्कि घर के भीतर भयंकर नकारात्मक ऊर्जा का सैलाब लाते हैं।

फटा जूता देता है शनि देव के प्रकोप को आमंत्रण



जोतिष शास्त्र के गंभीर सिद्धांतों के अनुसार, मनुष्य के पैरों और उसके द्वारा पहने जाने वाले जूतों का सीधा संबंध क्रूर और अनुशासित ग्रह शनि से होता है। शनि देव को हमारे कर्म, जीवन के कड़े संघर्ष और अनुशासन का मुख्य कारक माना जाता है। ऐसे में जब भी कोई व्यक्ति फटी हुई या सिली हुई चप्पलें पहनकर बाहर निकलता है, तो वह ब्रह्मांड में मौजूद शनि की नकारात्मक तरंगों को अपनी तरफ खींचता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इस खगोलीय प्रभाव को प्रमाणित नहीं करता, लेकिन सदियों पुरानी पारंपरिक मान्यताओं में इसे आपके सीधे बनते हुए कामों में अचानक बड़ी बाधाएं आने और व्यापार में भारी घाटे से जोड़कर देखा जाता है।

इस कारण शुरू होती है आर्थिक कंगाली

वास्तु  शास्त्र स्पष्ट रूप से मानता है कि इस दुनिया की हर निर्जीव वस्तु में अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। टूटी-फूटी चीजें सीधे तौर पर वास्तु दोष उत्पन्न करती हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच बेवजह का मानसिक तनाव, क्लेश और अशांति का माहौल बनने लगता है। चप्पलें स्वभाव से ही बाहर की गंदगी, धूल और नकारात्मक तत्वों को समेटती हैं। यदि आप टूटी हुई चप्पल घर के आंगन या मुख्य द्वार पर रखते हैं, तो यह इस बात का प्रतीक है कि आप बाहरी बाधाओं को बिना किसी रोक-टोक के अपने निजी जीवन में प्रवेश दे रहे हैं।

वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे खराब फुटवियर घर में धन की देवी मां लक्ष्मी की विरोधी और दरिद्रता की प्रतीक देवी अलक्ष्मी का परमानेंट वास करवा देते हैं। इसके प्रभाव से घर में धन की आवक पूरी तरह रुक जाती है और अस्पताल व कोर्ट-कचहरी जैसे अनचाहे कामों में पैसों का भारी नुकसान होने लगता है।

टूटे जूते और मनोवैज्ञानिक कारण

धार्मिक पहलुओं से अलग हटकर अगर व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें, तो फटे हुए जूते-चप्पल आपके पूरे व्यक्तित्व को खराब कर देते हैं। किसी जरूरी बिजनेस मीटिंग, नौकरी के इंटरव्यू या मांगलिक कार्यों के अवसर पर साफ और चमकीले फुटवियर आपके भीतर एक गजब का आत्मविश्वास पैदा करते हैं। इसके विपरीत, मोची से सिली हुई चप्पलें सामने वाले व्यक्ति पर आपका बेहद खराब और नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं, जिससे करियर में आगे बढ़ने के मौके हाथ से निकल जाते हैं।

जरूरतमंद को दे दें जूते

अगर आपके घर के किसी कोने या सीढ़ियों के नीचे सालों पुराने अनुपयोगी जूते-चप्पल जमा हैं, तो उन्हें तुरंत वहां से हटा दें। ज्योतिष के अनुसार, यदि फुटवियर पहनने लायक स्थिति में थोड़े बहुत ठीक हैं, तो उन्हें साफ करके किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को दान कर देना चाहिए। लेकिन अगर वे पूरी तरह टूट चुके हैं और कबाड़ बन चुके हैं, तो शनिवार के दिन उन्हें घर की सीमा से बाहर निकाल कर उचित तरीके से विसर्जित या नष्ट कर देना चाहिए ताकि घर का वास्तु हमेशा सही रहे।

मंगलवार, 2 जून 2026

Sunroof Car Disadvantages: सनरूफ वाली कार मालिकों की बढ़ी टेंशन, माइलेज गिरने के साथ एसी हो रहा फेल

 Sunroof Car Problems in Summer : चिलचिलाती धूप में कार का सनरूफ फीचर आफत बन रहा है। ताप्ती गर्मी में सनरूफ के कारण कारों का केबिन भट्टी की तरह तप रहा है। इसके साथ ही कार की माइलेज घटने की शिकायतें आ रही हैं। इसको देखते हुए ऑटो एक्सपर्ट्स ने इस मौसम में सनरूफ कारों के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर जरूरी चेतावनी जारी की है।

इस भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में कार खरीदारों का सबसे पसंदीदा सनरूफ फीचर अब उनके लिए जी का जंजाल बन गया है। कुछ साल पहले तक सिर्फ महंगी गाड़ियों में आने वाला यह प्रीमियम फीचर अब बजट कारों में भी धड़ल्ले से मिल रहा है। लोग कार को स्टाइलिश लुक देने और ताजी हवा के लिए इसे खरीदते तो हैं, लेकिन जून की इस तपती धूप में यही सनरूफ कार सवारों की सेहत और जेब दोनों पर भारी पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल्स विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मी के इस मौसम में सनरूफ वाली कारों के रखरखाव में लापरवाही भारी नुकसान करा सकती है।

भट्टी की तरह तप रहा है केबिन और घट रहा है माइलेज



वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सनरूफ में इस्तेमाल होने वाला कांच गाड़ी की लोहे वाली मजबूत छत की तुलना में बेहद तेजी से गर्मी को केबिन के अंदर ट्रांसफर करता है। भले ही आजकल की नई कारों में यूवी-प्रोटेक्टेड या टिंटेड ग्लास दिए जा रहे हैं, लेकिन दोपहर की सीधी धूप पड़ते ही कार के अंदर का तापमान सामान्य गाड़ियों से कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। जब केबिन इतना ज्यादा गर्म हो जाता है, तो कार के एयर कंडीशनर (AC) को अंदरूनी हिस्से को ठंडा करने के लिए दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है। कंप्रेसर पर लगातार दबाव बने रहने से गाड़ी के इंजन पर लोड पड़ता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत अचानक बढ़ जाती है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में तो इसके चलते बैटरी बहुत तेजी से डिस्चार्ज होने लगती है, जिससे उनकी ड्राइविंग रेंज सीधे तौर पर घट जाती है।

सेहत पर सीधा हमला और रबर सील खराब होने का डर

गर्मियों के दिनों में शौक-शौक में सनरूफ खोलकर ड्राइविंग करना सीधे तौर पर बीमारियों को बुलावा देना है। दोपहर के वक्त सीधे सिर और चेहरे पर पड़ने वाली तेज धूप के कारण कार सवारों को अचानक सिरदर्द, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और स्किन एलर्जी जैसी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही इस झुलसाने वाले तापमान और सड़कों पर उड़ने वाली धूल-मिट्टी का सीधा असर सनरूफ मैकेनिज्म पर पड़ता है। अत्यधिक गर्मी के कारण सनरूफ के चारों तरफ लगी रबर की वॉटरप्रूफ सील सूखकर चटकने लगती है। अगर समय रहते इसकी सर्विसिंग न कराई जाए, तो आने वाले बरसाती मौसम में कार की छत से पानी टपकने की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

चलती कार में बच्चों को बाहर निकालना जानलेवा

सड़कों पर अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता अपनी चलती गाड़ी के सनरूफ से बच्चों को बाहर निकाल देते हैं। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे व्यस्त इलाकों में यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ट्रैफिक नियमों का गंभीर उल्लंघन है। तेज रफ्तार गाड़ी में अचानक ब्रेक लगने या सड़क के गड्ढों के कारण बच्चा सीधे बाहर गिर सकता है या उसे गंभीर चोट आ सकती है। इसके अलावा इस मौसम की गर्म थपेड़े और लू के सीधे संपर्क में आने से बच्चे तुरंत बीमार पड़ रहे हैं।

तपती गर्मी में सनरूफ कार मालिकों के लिए जरूरी टिप्स

इस मौसम में कार को हमेशा किसी शेड या छायादार जगह पर ही पार्क करने की कोशिश करें। धूप में गाड़ी चलाते समय सनरूफ के नीचे दिए गए कपड़े के सनशेड (ब्लाइंड) को हमेशा पूरी तरह बंद रखें। अगर आपकी कार धूप में खड़ी थी, तो सीधे एसी ऑन करके बैठने के बजाय पहले दो मिनट के लिए कार के चारों दरवाजे खोल दें ताकि अंदर की गर्म हवा बाहर निकल जाए। दोपहर के समय सनरूफ को पूरी तरह बंद रखें। इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चे सनरूफ से बाहर निकलने की जिद करें तो साफ मन कर दें।

क्या आपकी राशि भी है इसमें शामिल? गुरु के कर्क राशि में आते ही पैसों के मामले में हो जाएं सावधान

 Guru Gochar 2026 : ग्रहों के राजा और ज्ञान के कारक देवगुरु बृहस्पति ने आज यानी 02 जून 2026 की रात 01:50 बजे एक बहुत बड़ा राशि परिवर्तन किया है। गुरु बृहस्पति अब अपनी पुरानी राशि को छोड़कर कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। ज्योतिष विज्ञान में इस गोचर को साल 2026 की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी खगोलीय घटना माना जा रहा है। आमतौर पर आम जनता यह मानती है कि गुरु का गोचर हमेशा शुभ और सोने जैसा भाग्य लेकर आता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इस बड़े बदलाव के कारण देश के आम आदमी की जेब, सेहत और पारिवारिक जीवन पर सीधा और बड़ा असर पड़ने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कुल 7 राशियां ऐसी हैं जिन्हें आने वाले समय में मौज-मस्ती करने के बजाय बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

कर्क, वृषभ और मेष राशि वाले अति-उत्साह से बचें



गुरु बृहस्पति सीधे आपकी ही राशि यानी कर्क में आ रहे हैं। यह स्थिति आपके भीतर आत्मविश्वास तो कूट-कूट कर भरेगी, लेकिन इसके साथ ही अति-उत्साह का एक बड़ा खतरा भी लेकर आएगी। अक्सर लोग किस्मत के भरोसे बैठकर मेहनत करना छोड़ देते हैं, यही गलती आपको भारी पड़ सकती है। अनुशासन बनाए रखें और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। वहीं वृषभ राशि वालों के लिए यह गोचर किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होने वाला है। आपको कार्यस्थल पर सफलता पाने के लिए एक्स्ट्रा जोर लगाना पड़ेगा, साथ ही सहकर्मियों और भाई-बहनों से बात करते समय अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना होगा। मेष राशि के जातकों को इस समय अपने घर और परिवार के मामलों में बहुत ज्यादा अलर्ट रहना होगा। घरेलू जिम्मेदारियां अचानक बढ़ेंगी और यदि आप कोई नई प्रॉपर्टी खरीदने या घर का रिनोवेशन कराने की सोच रहे हैं, तो बिना कागजात पढ़े साइन बिल्कुल न करें।

कुंभ और तुला राशि के जातकों पर बढ़ेगा काम का बोझ

कुंभ राशि के नौकरीपेशा लोगों को अब ऑफिस में काफी भागदौड़ और कड़े कंपटीशन का सामना करना पड़ेगा। काम का अत्यधिक बोझ आपको मानसिक रूप से चिड़चिड़ा बना सकता है, जिससे बचने के लिए आपको अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना होगा। यदि आपका कोई पुराना कर्ज या कानूनी झगड़ा चल रहा है, तो उसे तुरंत निपटा लें, वरना मुसीबत बढ़ सकती है। तुला राशि वालों के लिए भी यह समय दफ्तर में जिम्मेदारियों का पहाड़ लेकर आने वाला है। आपको तरक्की के नए मौके जरूर मिलेंगे, लेकिन उसके साथ आने वाला मानसिक प्रेशर आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है। कार्यस्थल पर ओवर-कॉन्फिडेंस में आकर कोई भी ऐसी बात न कहें, जो आपके प्रोफेशनल रिश्तों को हमेशा के लिए खराब कर दे।

धनु और सिंह राशि वाले आर्थिक फैसलों में बरतें भारी सावधानी

धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर जीवन में किसी बहुत बड़े और अचानक आने वाले बदलाव का साफ संकेत है। आपके करियर या पर्सनल लाइफ में अचानक कोई नया मोड़ आ सकता है। इस दौरान पैतृक संपत्ति, इंश्योरेंस या टैक्स से जुड़े पैसों के लेन-देन के मामले बुरी तरह उलझ सकते हैं, इसलिए ठंडे दिमाग से ही कोई भी फैसला लें। सिंह राशि वाले जातकों के लिए गुरु का यह राशि परिवर्तन जेब पर भारी पड़ने वाला है। अचानक होने वाली यात्राओं, सेहत से जुड़ी दिक्कतों या परिवार की जरूरतों पर आपका मोटा पैसा खर्च होने के योग बन रहे हैं। मानसिक उलझनों के कारण गलत फैसले लेने से बचें और अपनी जमा-पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करें।

गर्मियों में बार-बार हो रहे हैं मुंह के छाले? कहीं वजह पेट की गर्मी तो नहीं?

 


Mouth Ulcers Home Remedies : गर्मियों के मौसम में तेज धूप और पसीने के साथ-साथ मुंह के छालों (Mouth Ulcers) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। शरीर में पानी की कमी, पेट की गर्मी और जरूरी विटामिनों का अभाव इसका मुख्य कारण बनता है। देश के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस असहज करने वाली बीमारी के सटीक कारण और इससे तुरंत राहत पाने के बेहद असरदार घरेलू उपायों की जानकारी साझा की है।

देशभर में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में मुंह के छालों (Summer Mouth Ulcers) से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। तेज धूप, पसीना और डिहाइड्रेशन के इस मौसम में जीभ, मसूड़ों और होंठों के अंदरूनी हिस्से में होने वाले ये सफेद-पीले घाव आम आदमी का जीना मुहाल कर रहे हैं। इस समस्या के चलते लोगों का खाना-पीना, बोलना और यहां तक कि पानी पीना भी दर्दनाक हो जाता है। ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा हॉस्पिटल के आंतरिक चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. श्रेय श्रीवास्तव और प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने इस समस्या के पीछे के वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक कारणों को स्पष्ट करते हुए इससे निपटने के कारगर तरीके बताए हैं।

डिहाइड्रेशन और पेट की खराबी है असली विलेन

शारदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक गर्मियों में इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी होना है। जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो मुंह सूखने लगता है और उसकी बेहद संवेदनशील अंदरूनी परत छिल जाती है, जो बाद में घाव का रूप ले लेती है। इसके अलावा, अत्यधिक पसीना बहने से शरीर से जरूरी विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड जैसे मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। इस मौसम में मसालेदार, तला-भुना और गर्म भोजन खाना सीधे तौर पर पेट की गर्मी और कब्ज को बढ़ाता है, जिसका सीधा असर मुंह के अंदर छालों के रूप में दिखाई देता है। मानसिक तनाव और अपर्याप्त नींद भी इस समस्या को गंभीर बना देती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अगर आपको मुंह के भीतर सफेद या पीले रंग के छोटे घाव दिखाई दे रहे हैं, जिनके चारों तरफ लालपन है, तो यह मुंह के छाले हैं। ऐसी स्थिति में तीखा या खट्टा खाने पर असहनीय जलन होती है। भोजन निगलने में होने वाली परेशानी और मुंह में लगातार होने वाली चुभन इसके प्राथमिक लक्षण हैं। आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही मानते हैं कि खानपान में थोड़ी सी सतर्कता और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस दर्दनाक समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है।

छालों को तुरंत शांत करेंगे ये घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय

डॉ. चंचल शर्मा ने छालों के दर्द और सूजन से तुरंत राहत पाने के लिए कुछ बेहद सरल और प्रभावी उपाय सुझाए हैं। नारियल पानी का नियमित सेवन शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है और पेट को अंदरूनी ठंडक देता है। इसके अलावा, भोजन के साथ ठंडी छाछ का इस्तेमाल पाचन तंत्र के प्रोबायोटिक्स को सक्रिय करता है, जिससे पेट साफ रहता है और छाले ठीक होते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी की 4-5 पत्तियां सुबह-शाम चबाने से मुंह के बैक्टीरिया खत्म होते हैं।

घाव पर साफ उंगली से शहद या एलोवेरा जेल लगाने से इसकी एंटी-बैक्टीरियल और हीलिंग प्रॉपर्टीज दर्द को तुरंत सोख लेती हैं। रात को सोने से पहले छालों पर थोड़ा देसी घी लगाने से त्वचा की नमी लौट आती है। इसके साथ ही, मुलेठी के पानी से कुल्ला करना या हल्के गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करना एक आजमाया हुआ नुस्खा है, जो संक्रमण को बढ़ने से रोकता है।

कब हो जाता है डॉक्टर को दिखाना जरूरी

आमतौर पर मुंह के ये साधारण घाव 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसके लिए बस मुंह की साफ-सफाई, गहरी नींद और तंबाकू-धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी होता है। लेकिन डॉ. श्रेय श्रीवास्तव सचेत करते हैं कि अगर आपके छाले दो सप्ताह से ज्यादा समय तक ठीक नहीं हो रहे हैं, या छालों का आकार लगातार बढ़ रहा है, तो लापरवाही भारी पड़ सकती है। बार-बार छालों का निकलना, असहनीय दर्द के कारण खाना पूरी तरह बंद हो जाना या छालों के साथ तेज बुखार आना किसी गंभीर अंदरूनी संक्रमण या बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

चाय शौकीन सावधान: सुबह और शाम की चाय में है बड़ा अंतर, एक गलती छीन लेगी रात की नींद

सेहत, फिटनेस, फैशन, ब्यूटी और रिलेशनशिप से जुड़ी आसान और उपयोगी जानकारी आपकी बेहतर लाइफस्टाइल के लिए।

सोमवार, 1 जून 2026

तपती गर्मी में भी फूलों से भर जाएगा गुड़हल का पौधा, बस आजमाएं एक्सपर्ट्स के ये आसान टिप्स

Summer Hibiscus Care Tips : उत्तर भारत समेत हरियाणा के कई जिलों में पारा तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। इस झुलसाने वाली धूप और लू के थपेड़ों के कारण घरों के बगीचों और बालकनी में लगे पौधे अक्सर सूखने या मुरझाने लगते हैं। लेकिन इस भीषण मौसम में भी लाल, पीले और गुलाबी रंग के फूलों से सजने वाला गुड़हल का पौधा आपके घर की रौनक बनाए रख सकता है। बशर्ते आपको चिलचिलाती धूप में इसकी देखभाल का सही तरीका पता हो। नर्सरी संचालकों और बागवानी एक्सपर्ट्स ने कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक टिप्स साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने गुड़हल के पौधे को पूरे सीजन हरा-भरा और फूलों से भरपूर रख सकते हैं।

सुबह का पानी और धूप का सही संतुलन है सबसे जरूरी


गर्मियों के इस कड़े मौसम में गुड़हल के पौधे को पानी देने का समय सबसे ज्यादा मायने रखता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो पौधे को हमेशा सुबह सूरज उगने के तुरंत बाद या जल्दी पानी देना चाहिए। इससे मिट्टी दिनभर की तेज धूप को झेलने के लिए तैयार हो जाती है और जड़ों को लगातार नमी मिलती रहती है। हालांकि गुड़हल को फूल उगाने के लिए सीधी धूप की जरूरत होती है, लेकिन मई-जून की दोपहर वाली तीखी धूप इसकी कोमल पत्तियों को जला सकती है। इसलिए गर्मियों में गमले को ऐसे स्थान पर शिफ्ट करें जहां सुबह की 4-5 घंटे की सीधी धूप मिले और दोपहर बाद हल्की छाया रहे। Read More

सूखती हुई तुलसी में जान फूंक देगा नीम का पानी, जानें इस्तेमाल का सही तरीका और सावधानियां

Neem Water for Tulsi Plant : हिंदू धर्म में आस्था का केंद्र और औषधीय गुणों की खान माना जाने वाला तुलसी का पौधा लगभग हर भारतीय घर के आंगन की शोभा बढ़ाता है। लेकिन अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि कड़ी देखभाल के बाद भी तुलसी का पौधा सूख जाता है, पत्तियां पीली पड़ जाती हैं या उनमें काले-सफेद कीड़े लग जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बागवानी विशेषज्ञों ने एक बेहद सस्ता और पूरी तरह से प्राकृतिक उपाय सुझाया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल कीटनाशकों के बजाय नीम का पानी तुलसी को पुनर्जीवन देने और उसे कीड़ों से बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

तुलसी के लिए संजीवनी क्यों माना जाता है नीम का पानी?


नीम को सदियों से एक बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-फंगल और कीटनाशक माना गया है। इसकी पत्तियों और छाल में ऐसे कड़वे तत्व पाए जाते हैं जो पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले बारीक कीड़ों, मिलीबग और एफिड्स को तुरंत दूर भगाते हैं। तुलसी पर अक्सर सफेद रंग के मिलीबग का हमला होता है, जो धीरे-धीरे पौधे का पूरा रस चूस लेते हैं। ऐसे में नीम का पानी पौधे पर एक अदृश्य सुरक्षा कवच बना देता है। चूंकि तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल चाय, काढ़े और पंचामृत में सीधे तौर पर होता है, इसलिए इस पर किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। Read More