Google Trademark Case Delhi High Court : गूगल के एकाधिकार और विज्ञापन बाजार में मनमानी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मशहूर सैनिटरीवेयर ब्रांड हिंडवेयर के ट्रेडमार्क का गलत इस्तेमाल होने के मामले में गूगल पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कानूनी लड़ाई साल 2013 से चल रही थी, जब हिंडवेयर ने अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों और गूगल के खिलाफ मोर्चा खोला था। अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला भारत के पूरे डिजिटल विज्ञापन उद्योग की दिशा और दशा को बदलने जा रहा है।
क्या है कीवर्ड विज्ञापन का पूरा विवाद और कैसे आम यूजर को गुमराह करता था गूगल
यह पूरा मामला कीवर्ड एडवरटाइजिंग की आड़ में चल रहे ब्रांड वैल्यू के अवैध इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है। साल 2013 में हिंडवेयर ने पाया कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियां 'सेरा' और 'ग्रोहे इंडिया' ने गूगल एड्स के माध्यम से "Hindware" शब्द को कीवर्ड के रूप में खरीद लिया था। इसके कारण जब भी कोई आम उपभोक्ता गूगल सर्च इंजन पर जाकर हिंडवेयर ब्रांड के प्रोडक्ट ढूंढता था, तो उसे स्क्रीन पर सबसे ऊपर इन दूसरी कंपनियों के विज्ञापन दिखाई देते थे। हिंडवेयर का सीधा आरोप था कि उनकी अनुमति के बिना उनके पंजीकृत और स्थापित ट्रेडमार्क का व्यावसायिक इस्तेमाल करके ग्राहकों को भटकाया जा रहा है।
बाद में हिंडवेयर का अपनी प्रतिद्वंदी कंपनियों के साथ तो समझौता हो गया, लेकिन गूगल इंडिया और गूगल एलएलसी के खिलाफ यह अदालती जंग जारी रही। गूगल ने कोर्ट में दलील दी थी कि कीवर्ड सिर्फ बैकएंड सिस्टम का हिस्सा होते हैं, जिन्हें यूजर सीधे नहीं देख पाते। गूगल का कहना था कि वह सिर्फ कीवर्ड बिडिंग की सुविधा देता है, जो पूरी तरह वैध है। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने टेक दिग्गज की इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने गूगल के विज्ञापन मॉडल को बताया 'फ्री-राइडिंग', लगाया प्रतिबंध
दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंडवेयर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए गूगल को "Hindware" और उससे जुड़े अन्य सभी शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में नीलाम करने से तुरंत रोक दिया है। अदालत ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि गूगल दूसरों की बरसों की मेहनत से बनी ब्रांड छवि और प्रतिष्ठा का गलत तरीके से व्यावसायिक लाभ उठा रहा था। कोर्ट ने इसे 'फ्री-राइडिंग' का नाम दिया, जहां गूगल किसी दूसरे के ट्रेडमार्क को प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को बेचकर खुद मोटी कमाई कर रहा था, जबकि उस ब्रांड पर गूगल का कोई मालिकाना हक नहीं है।
भारतीय टेक दिग्गजों ने किया फैसले का स्वागत
दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद भारतीय कॉरपोरेट जगत और टेक इंडस्ट्री के बड़े दिग्गजों की जबरदस्त प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने जेरोधा के सीईओ नितिन कामथ के एक सोशल मीडिया पोस्ट का खुलकर समर्थन किया है।
I am with Nithin on this.
What Google was doing was completely unethical and I am glad it has been found illegal in India. They need to be held to account for these shady business practices. https://t.co/fXCGlfD6s8
— Sridhar Vembu (@svembu) May 29, 2026
श्रीधर वेम्बू ने एक्स पर लिखा कि गूगल जो कर रहा था, वह पूरी तरह से अनैतिक था और भारत में इसे अवैध ठहराया जाना एक बेहतरीन कदम है। उन्होंने साफ कहा कि इन संदिग्ध कारोबारी तौर-तरीकों के लिए गूगल को जवाबदेह बनाना ही होगा।
In a landmark judgment on May 22, 2026, the Delhi High Court held Google liable for trademark infringement.
The case was between Hindware and Google. The court held that, by allowing competitors of Hindware to purchase the keyword “Hindware” (a trademarked name) through Google…
— Nithin Kamath (@Nithin0dha) May 29, 2026
जेरोधा के सीईओ नितिन कामथ ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए अपना दर्द साझा किया। नितिन कामथ ने बताया कि एक दशक से भी ज्यादा समय से उनकी कंपनी इस समस्या से जूझ रही है। अगर आज भी कोई इंटरनेट पर 'Zerodha' सर्च करता है, तो शुरुआती सर्च रिजल्ट में प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विज्ञापन दिखाई देते हैं। कामथ के मुताबिक इस खेल की वजह से जेरोधा को भारी बिजनेस का नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि असली ग्राहक भटककर दूसरी वेबसाइटों पर चले जाते हैं। शार्क टैंक इंडिया के जज और शादी डॉट कॉम (Shaadi.com) के संस्थापक अनुपम मित्तल ने भी इसे भारतीय कॉरपोरेट जगत की इस हफ्ते की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खबर बताया है। मित्तल का मानना है कि इस फैसले से भारत में डिजिटल विज्ञापन के पूरे अर्थशास्त्र में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।
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