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बुधवार, 4 नवंबर 2026

शुक्र गोचर 2026: कन्या में नीच होंगे शुक्र, मेष से लेकर मीन तक किसकी बढ़ेंगी मुश्किलें?

वैदिक ज्योतिष में भौतिक सुख, प्रेम, दांपत्य और समृद्धि के प्रतिनिधि ग्रह शुक्र 6 नवंबर 2026 को कन्या राशि में गोचर करेंगे। कन्या राशि में शुक्र ग्रह नीच अवस्था में माने जाते हैं, जिससे व्यक्तिगत जीवन, विवाह और वित्तीय संतुलन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।


इस पूरी अवधि के दौरान शुक्र की वक्री स्थिति भी बनी रहेगी, जिसके चलते पांच प्रमुख राशियों को खर्चों और रिश्तों पर विशेष ध्यान देना होगा। Read More

रविवार, 1 नवंबर 2026

कन्या राशि में नीच के होंगे शुक्रदेव, 16 दिनों तक इन 4 राशियों को संभलकर लेने होंगे फैसले

वैदिक ज्योतिष में सुख, वैभव, दांपत्य और सौंदर्य के कारक माने जाने वाले शुक्रदेव 6 नवंबर 2026 को भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 1:06 बजे तुला राशि से निकलकर कन्या राशि में वक्री गोचर करेंगे। कन्या राशि शुक्रदेव की नीच राशि मानी जाती है, इसलिए इस राशि में उनका वक्री होना प्रेम संबंधों, वित्तीय प्राथमिकताओं, विवाह और जीवनशैली पर सीधा असर डालेगा। 


वक्री चाल के चलते पुराने विवाद, रुके हुए भुगतान और पुराने फैसले दोबारा समीक्षा के लिए सामने आएंगे। शुक्रदेव 14 नवंबर को मार्गी होंगे और इसके बाद 22 नवंबर 2026 को वापस स्वराशि तुला में प्रवेश कर जाएंगे। Read More

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

12 से 29 अक्टूबर तक अस्त रहेंगे शुक्रदेव: जानिए विवाह पर रोक का समय और 5 राशियों के लिए जरूरी उपाय

वैदिक ज्योतिष में दैत्यगुरु शुक्रदेव को दांपत्य सुख, प्रेम संबंध, विलासिता, ऐश्वर्य और धन का मुख्य कारक ग्रह माना गया है। 12 अक्टूबर 2026 को शाम 6 बजकर 19 मिनट पर शुक्र तारा अपनी ही स्वराशि तुला में अस्त होने जा रहा है। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सुबह 6 बजे शुक्र का पुनः उदय होगा।


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कुल 17 दिनों तक चलने वाले इस अस्त काल में शुक्रदेव की ऊर्जा में कमी मानी जाती है। सनातन परंपरा और पंचांग गणना के अनुसार जब शुक्र या गुरु तारा अस्त होता है, तब विवाह, मुंडन, सगाई और गृह प्रवेश जैसे बड़े मांगलिक कार्यों को करने से पूरी तरह परहेज किया जाता है। आम लोगों के जीवन में यह अवधि वित्तीय अनुशासन और रिश्तों में परिपक्वता दिखाने की परीक्षा बनेगी। Read More