11 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व में अब महाअष्टमी और महानवमी के दिन होने वाले कन्या पूजन (कंजक पूजन) की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में कंजक पूजन के बिना नौ दिनों के व्रत व अनुष्ठान को अधूरा माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की नौ कन्याओं को मां भगवती का साक्षात विग्रह मानकर पूजा जाता है। इस पूजन से जातक की कुंडली में नवग्रहों की शांति होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है। Read More
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