वैदिक ज्योतिष में अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अत्यंत दुर्लभ और स्वयं-सिद्ध योग माना गया है। वर्ष 2026 में 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पावन पर्व श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त के संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, रावण पर श्रीराम की विजय सूर्य के आत्मबल और धर्म के प्रतीक देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव को दर्शाती है, वहीं मां दुर्गा द्वारा महिषासुर मर्दन शक्ति स्वरूपा मंगल और चंद्र के संतुलन का प्रतीक है।
दशहरे के दिन किए गए पुण्य कर्म और ज्योतिषीय उपाय जहां नवग्रहों की शांति करते हैं, वहीं अनजाने में किए गए कुछ वर्जित कार्य कुंडली के शुभ ग्रहों को कमजोर कर देते हैं। धर्म और ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, दशहरे के दिन कुछ विशेष कार्यों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए ताकि ग्रहों के अशुभ प्रभावों से बचा जा सके। Read More

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