वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, विचार, मानसिक शांति, माता और रोजमर्रा के फैसलों का प्रत्यक्ष कारक माना जाता है। 13 अक्टूबर 2026 की शाम 7 बजकर 12 मिनट पर चंद्रमा तुला राशि से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाली जलतत्व राशि वृश्चिक में प्रवेश कर चुके हैं। वे 16 अक्टूबर 2026 की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक इसी राशि में विराजमान रहेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में वृश्चिक राशि को चंद्रमा की नीच राशि माना गया है, जहां उनकी सौम्य और शांत ऊर्जा काफी कमजोर पड़ जाती है। नीच राशि में चंद्रमा के संचरण से लोगों के भीतर भावनात्मक संवेदनशीलता अचानक बढ़ जाती है। इस दौरान छोटी-छोटी बातों को दिल से लगाना, पुरानी कड़वी यादों को दोहराना या आवेश में आकर प्रतिक्रिया देना व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है। Read More

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